Punjab Lok Sabha: जानिए अकाली और BJP गठबंधन का इतिहास, अलग होने पर किसको कितना नुकसान?

कई राज्यों में भाजपा ने अन्य दलों से गठबंधन किया है। ओडिशा के बाद पंजाब में भी NDA की बात नहीं बन पाई। अकाली दल के साथ समझौता नहीं होने पर BJP पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया।

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Punjab Lok Sabha: NDA ‘मिशन 400 पार’ के साथ 2024 के चुनावी मैदान में है। इसके लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों को NDA के साथ जोड़ने की मुहिम भी चल रही है। लेकिन NDA की इस मुहिम को एक बार फिर झटका लगा है। पहले ओडिशा में BJD के साथ बात नहीं बनी तो अब पंजाब में अकाली दल के साथ कई दौर की बातचीत के बाद सहमति नहीं बन सकी। जिसके बाद BJP ने यहां अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।

पंजाब (Punjab Lok Sabha) में पिछले कई दिनों से BJP और अकाली दल के बीच समझौता कंफ़र्म होने की अटकलें तेज़ थीं। इसको इसलिए भी पुख़्ता माना जा रहा था क्योंकि शिरोमणि अकाली दल हमेशा से NDA का स्वाभाविक घटक रहा है।

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1998 में NDA के गठन के साथ इससे जुड़ा अकाली दल क़रीब ढाई दशक तक NDA का अटूट हिस्सा रहा। 2021 में केंद्र के कृषि क़ानून और किसानों के विरोध के डर से अकाली दल ने NDA का साथ तो ज़रूर छोड़ा। लेकिन इसका चुनावी फ़ायदा उसे नहीं मिला। तभी से गाहे-बगाहे ये चर्चा होती रही है कि अकाली दल की NDA में वापसी हो सकती है। लेकिन अब 2024 के चुनाव में तो फिलहाल ऐसा नहीं हो सका।

आइए अब आपको NDA और अकाली के बीच समझौता नहीं होने के पीछे तीन प्रमुख वजह बताते हैं

पहली वजह

अकाली पिछली बार की 3 सीटों की तुलना में BJP को 5 सीटें देना चाहती थी, लेकिन BJP 6 सीटों से कम पर तैयार नहीं थी

दूसरी वजह
अकाली चाहती थी कि किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार जल्द फ़ैसला ले

तीसरी वजह
असम के जेल में बंद अमृतपाल पर लगे NSA को हटाने की थी। लेकिन इन तीनों ही मुद्दों पर बात नहीं बन सकी।

अब बात पंजाब में दोनों दलों के वोट बैंक की

साल 2019 में दोनों दलों ने साथ मिलकर लोक सभा चुनाव लड़ा था। जिसमें BJP और अकाली दल दोनों ने 2-2 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि इस चुनाव में कुल 13 सीटों में अकाली दल ने 10 सीटों पर जबकि BJP ने सिर्फ़ तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था। 10 सीटों पर अकाली को क़रीब 28 प्रतिशत जबकि तीन सीटों पर BJP ने क़रीब 10 प्रतिशत वोट हासिल किये थे।

वहीं 2022 के विधान सभा चुनाव में दोनों ही दल अलग-अलग मैदान में उतरे। 117 सीटों वाली विधान सभा के लिए अकाली दल ने 97 उम्मीदवार उतारे और क़रीब 22 प्रतिशत वोट के साथ सिर्फ़ तीन सीटों पर ही जीत दर्ज कर सका। वहीं 73 सीटों पर लड़ने वाली BJP ने 10 प्रतिशत से अधिक वोट प्रतिशत के साथ दो सीटों पर जीत हासिल की।

तो कुल मिलाकर पंजाब के चुनावी मैदान में इस बार कोई गठबंधन नहीं उतरेगा। ना तो दिल्ली में साथ लड़ने वाली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की यहां बात बनी और ना ही NDA का समझौता कामयाब हो सका। ऐसे में पंजाब की 13 सीटों पर अब चौतरफ़ा मुक़ाबला तय है।

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