Mission Chandrayaan-3: क्या होता है लास्ट मिनट्स ऑफ टेरर? रूस के मिशन फेल होने के बाद क्यों ISRO की अटकी है सांसे?

हर स्पेस मिशन के आखिरी 15 से 20 मिनट बेहद अहम होते हैं, जिसे लास्ट मिनट्स ऑफ टेरर कहा जाता है। 23 अगस्त की शाम को चंद्रयान-3 का लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा। उस पल का हर मिनट बेहद अहम माना जाता है। क्योंकि उसी पल में पूरे मिशन की कामयाबी टिकी होती है। ये वो पल होता है जब लैंडर चांद की सतह पर लैंड करता है।

इसे जरूर पढ़ें।

सांसें अटक जाएंगी .. दिल दशहत से भर जाएगा… दिमाग दुआओं में मशगूल हो जाएगा… क्योंकि आने वाला है मिशन मून का वो अंतिम पल जिसे कहते हैं लॉस्ट मिनट्स ऑफ टेरर

हर स्पेश मिशन का अंतिम पल बेहद अहम होता है। इसी से पूरे मिशन का भविष्य तय होता है। ये वो पल है जिससे तय होता है कि मिशन आगे कामयाब होगा या नहीं। ये वो पल होता है जब इस मिशन से जुड़े सभी लोग आशंकाओं से भरे होते हैं। उस देश के लोग के मन में कौतूहल होता है कि स्पेश मिशन कामयाब होगा या नहीं। तो चलिए आपको बतातते हैं कि असल में वो कौन सा पल होगा जिसे मिशन चंद्रयान-3 का लॉस्ट मिनट्स ऑफ टेरर कहा जाता है।

ये वो पल होगा जब चंद्रयान-3 चांच के सबसे क़रीब होगा। ये वो वक्त होगा जब चंद्रयान की गति सबसे कम होगी। ये वो पल होगा जब लैंडर चांद के ऑर्बिट से चांद की सतह पर लैंड करेगा।

लैंडिंग के दौरान लैंडर विक्रम अपने विवेक यानी खुद से फैसले लेगा और लैंड करेगा। ये वो वक्त होगा जब ग्राउंड स्टेशन से सीधे उसे कोई कमांड नहीं मिलेगा। यानी लैंडर ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसमें फीड किए आंकड़ों की मदद से फैसला लेगा और चांच की सतह पर साफ़ट लैंडिंग करेगा।

लॉस्ट मिनट्स ऑफ टेरर का वक्त करीब 15 से 20 मिनट का होता है। ये वो वक्त होगा जब लैंडर चांद की सतह पर उतरने की कोशिश करेगा और ये पल 23 अगस्त 2023 को आएगा। जब भारत ही नहीं, पूरी दुनिया को 23 अगस्‍त 2023 का बेसब्री से इंतजार है। ISRO के वैज्ञानिकों के मुताबिक यही वह दिन है जब चंद्रयान-3 को चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। ISRO का पिछला मून मिशन यानी चंद्रयान-2 भी इसी लास्ट मिनट्स ऑफ टेरर का शिकार हुआ था।

चंद्रयान 2 के लिए ISRO यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने चार शब्द कहे थे, जिसे सुनकर हर कोई सहम गया था। ये शब्द थे ’15 Minutes of Terror’ यानी ‘खौफ के 15 मिनट’ और यही वो पल चंद्रयान 3 का भी आने वाला है

जब 23 अगस्त की शाम चंद्रयान 3 चांद की सतह पर लैंड करेगा। जापानी प्राइवेट कंपनी का HAKUTO-R भी चांद की सतह पर जाकर अंतिम पलों में असफल हो गया। हालांकि इस बार चंद्रयान मिशन में काफी बदलाव किए गए हैं।

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चांद पर जय हिन्द’

चंद्रयान 3.O लॉन्च 

14 जुलाई

चांद की पहली कक्षा में पहुँचा

5 अगस्त

चांद की दूसरी कक्षा में पहुँचा

6 अगस्त

चांद की तीसरी कक्षा में पहुँचा

9 अगस्त

प्रॉपल्शन और लैंडर अलग हुए

17 अगस्त

चांद की दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग होगी

23 अगस्त

चलो चांद पर चलें 

चांद से कितनी दूर है चंद्रयान 3? =        चांद से सिर्फ़ 113 Km दूर है चंद्रयान 3 का लैंडर

कब होगी चंद्रयान 3 की लैंडिंग? =       23 अगस्त को चांद पर उतरेगा लैंडर

लैंडिंग में अभी क्या मुश्किल?    =        लैंडर की रफ़्तार 2 मीटर प्रति सेकंड लानी होगी

23 अगस्त को ही लैंडिंग क्यों?  =          अभी चांद पर रात है 23 अगस्त को चांद पर सूर्योदय होगा

23 अगस्त को ही लैंडिंग क्यों? =           लैंडर, रोवर ताक़त पैदा करने के लिए सोलर पैनल का इस्तेमाल करेंगे 

चंद्रयान 3 क्या काम करेगा?     =         धरती से आने वाले रेडिएशन का अध्ययन करेगा

चंद्रयान 3 क्या काम करेगा?     =         चांद की सतह पर पानी, खनिज की खोज करेगा

साउथ पोल पर ही चंद्रयान 3 क्यों भेजा गया? =     2008 में चंद्रयान 1 ने चांद के इस हिस्से में पानी के संकेत दिए थे

इस बार लैंडर में 5 की जगह 4 इंजन क्यों?  =      पांचवें इंजन की जगह ईंधन भेजा गया है 

14 दिन का ही मिशन क्यों? =               चांद पर 14 दिन रात और 14 दिन उजाला होता है

14 दिन का ही मिशन क्यों?   =            उजाले में मिशन को पूरा करने में आसानी होगी

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