रूस के बाद चीन की सीमा पर पहुंचा NATO, चीन के इस पड़ोसी देश में खुल रहा ऑफिस

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जापान में NATO का ऑफ़िस खोलने के फ़ैसले से चीन बुरी तरह भड़क गया। उसने NATO और अमेरिका को सीधी चेतावनी दे दी। चीन ने कहा कि कि इससे ऐशिया की शांति और स्थिरता कम होगी और टकराव बढ़ेगा। असल में जापान के मीडिया ने दावा किया कि NATO जल्द ही टोक्यो में अपना एक दफ़्तर खोलेगा, जो एशिया में NATO का पहला ऑफ़िस होगा। जैसे ही ये ख़बर बीजिंग पहुँची हड़कंप मच गया। ग़ुस्से में तमतमाए चीन के विदेश मंत्रालय ने आपत्ति जता दिया। और कहा कि वो शांति, सहयोग और विकास की धरती, एशिया को कुश्ती का अखाड़ा नहीं बनने देगा।

चीन को जापान में NATO की दस्तक किसी भी क़ीमत पर मंजूर नहीं। लेकिन अमेरिका NATO के ऑफ़िस के ज़रिए ऐशिया में अपनी धमक बढ़ाना चाहता है। ताकि चीन की दादागीरी पर लगाम लगाई जा सके। क्योंकि आए दिन चीन अपने पड़ोसियों से उलझता रहता है। वो कभी ताइवान और वियतनाम को धमकाता है तो कभी फ़िलिपींस, मलेशिया, ब्रुनेई, जापान को युद्ध की चेतावनी देता है। हालांकि साउथ चाइना सी के कई इलाक़ों में चीन की चाल को नाकाम करने के लिए अमेरिका पहले से ही ऐक्टिव है। लेकिन जापान में NATO का ऑफ़िस खुल जाने से उसकी पहुँच सीधे बीजिंग तक हो जाएगी। वहां से चौबीसों घंटे अमेरिका उसकी हरकतों पर नज़र रख सकेगा। टोक्यो में खुलने वाले दफ़्तर से NATO हिंद प्रशांत महासागर के आस पास मौजूद देशों की मदद भी करेगा। जिनमें जापान के अलावा दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यू ज़ीलैंड शामिल हैं

अमेरिका ने NATO के दफ़्तर के ज़रिए चीन को घेरने के लिए बड़ा प्लैन तैयार कर लिया है। हालांकि टोक्यों में ये ऑफ़िस कब तक खुलेगा इस बात की जानकारी अब तक नहीं मिल सकी है। लेकिन जपान के मीडिया के मुताबिक़ इस साल जनवरी में NATO महासचिव ने जापान की यात्रा की थी। तभी वहां NATO का ऑफ़िस खोलने की पटकथा लिखी गई।NATO के महासचिव येन्स स्तोलतनबर्ग ने जापान के प्राधनमंत्री फुमीयो किशिदा के सामने इसका प्रस्ताव रखा। जापान के मीडिया के मुताबिक़ अप्रैल महीने में NATO ने इसके लिए अपने 31 सदस्यों के बीच एक प्रस्ताव भी पारित करवा लिया। मतलब ये कि अप्रैल में ही जापान की राजधानी टोक्यो में NATO का ऑफ़िस खोलने पर उसके 31 सदस्यों ने रजामंदी दे दी।

NATO ने टोक्यो में अब तक सिर्फ़ अपना ऑफ़िस खोलने की प्लैनिंग की है। लेकिन माना जा रहा है कि कुछ सालों में जापान NATO में शामिल हो सकता है। जो चीन के लिए ख़तरे की घंटी होगी। इसी वज़ह से वो बुरी तरह बौखलाया हुआ है।

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