Pakistan: पाकिस्तान में निवेश कर बुरी तरह फंस गया चीन, 40 अरब का काम रोकने पर हुआ मजबूर, जानिए आगे क्या कर सकता है चीन

Imran Khan: राजनीतिक उठा पटक ने पाकिस्तान की पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए। हालांकि शहबाज़ शरीफ़ सरकार और उसके समर्थक दल इसे एक विदेशी साज़िश करार दे रहे हैं। अमेरिका और इज़राइल को इसके लिए कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। जबकि पाकिस्तान के लिए एक और मुसीबत बीजिंग से चलकर आई है। जो CPEC के प्रॉजेक्ट में देरी होने पर इस्लामाबाद से बेहद नाराज़ हैं।

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इमरान ख़ान के एपिसोड ने पाकिस्तान में उथल पुथल मचा दी है। पूरे पाकिस्तान में पहले से ही आर्थिक मंदी की वजह से हाहाकर मचा हुआ था। उसी बीच में राजनीतिक उठा पटक ने पाकिस्तान की पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए। हालांकि शहबाज़ शरीफ़ सरकार और उसके समर्थक दल इसे एक विदेशी साज़िश करार दे रहे हैं। अमेरिका और इज़राइल को इसके लिए कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। जबकि पाकिस्तान के लिए एक और मुसीबत बीजिंग से चलकर आई है। जो CPEC के प्रॉजेक्ट में देरी होने पर इस्लामाबाद से बेहद नाराज़ हैं।

लंदन प्लान फैल होने का आरोप

इमरान ख़ान ज़िद पर अड़े हैं। शहबाज़ सरकार भी ज़िद पर अड़ी है। कोर्ट और आर्मी का खेल चल रहा है। पाकिस्तान में सियासी जंग अब मुल्क के सबसे बुरे दौर की ओर बढ़ती जा रही है। इसके लिए विदेशी साज़िश का कार्ड खेला जाने लगा है। इमरान ख़ान जहां अपने ख़िलाफ़ लंदन से साज़िश रचे जाने का आरोप लगा रहे हैं। लगातार लंदन प्लान की बातें कर रहे हैं। तो वहीं पाकिस्तान की सबसे बड़ी मज़हबी पार्टी जमीयत उलेमा ए इस्लाम ने इमरान पर हमला बोला है। उन्हें अमेरिकी और यहूदी एजेंट क़रार दे दिया। मौलाना फ़ज़ल-उर-रहमान ने कहा कि आप ख़ुद अंदाज़ा लगाएं, कि कल तक जो ख़त लहरा रहा था कि मुझे अमेरिका ने सत्ता से उतारा है। आज उसके लॉबिस्ट वहां पर, जो इनसे तनख़्वाह वसूलते हैं, वो भी यहूदी हैं। वहां की संसद की इतनी बड़ी तादाद, जो आज उसके हक़ में ख़त लिख रही है। जो पाकिस्तान के मामले में लगातार दख़ल दे रही है। इससे साफ़ हो जाता है कि ये किसका एजेंट है और किस एजेंडे पर काम कर रहा है।

आर्थिक के बाद राजनीतिक संकट

दरअसल पूरी दुनिया की नज़र पाकिस्तान में आए सियासी और आर्थिक संकट पर है। दुनिया भर की हुकूमतें पाकिस्तान में हालात को सामान्य करने के लिए ज़ोर दे रही हैं। ख़ास तौर पर इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी पर सवाल उठाये जा रहे थे। जिसे पाकिस्तान की शहबाज़ शरीफ़ सरकार अपने विरोध में ले रही है। पहले भी इमरान सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले सुन्नी कट्टरपंथी दल के नेता मौलाना फ़ज़ल-उर-रहमान एक बार फ़िर इमरान को विदेशी ताक़तों से प्रभावित बताने में जुटे हैं।मौलाना फ़ज़ल-उर-रहमान ने कहा कि हम ये समझते हैं कि पाकिस्तान को एक ख़ास मकसद के तहत हुकूमत को तबाह करने का एक घिनौना निजी एजेंडा है। इमरान ख़ान को उस एजेंडे को पूरा करने के लिए पाकिस्तान की सियासत में इंजेक्ट किया गया है।

इमरान पर पाकिस्तान को बदनाम करने का आरोप

9 और 10 मई को पाकिस्तान में जबरदस्त बवाल हुआ था। पूरे देश में हिंसा और आगज़नी की गई थी। शरीफ़ सरकार इस हिंसा को ही हथियार बनाकर अब इमरान ख़ान को पाकिस्तान के आर्मी ऐक्ट और ऑफ़िशियल सीक्रेट ऐक्ट में फंसाने की तैयारी में है। ऐसे में अब न सिर्फ़ पाकिस्तान बल्कि दुनिया भर में पाकिस्तान के इस कुख़्यात क़ानून को लेकर बातें होने लगी हैं। जबकि जमीयत उलेमा ए इस्लाम का आरोप है कि पाकिस्तान की अदालतें इमरान ख़ान को विदेशी साज़िश के तहत बचाने में जुटी हैं। यही हिंसा, यही बवाल पाकिस्तान की आर्थिक व्यवस्था को भी तोड़ रहा है। शरीफ़ सरकार पूरी दुनिया में भीख़ मांग रही है। लेकिन तमाम देशों से मदद मिलने के बावजूद पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को मज़बूती नहीं मिल रही है। बल्कि पाकिस्तान के आर्थिक हालात लगातार कमज़ोर होते जा रहे हैं। महंगाई तो महंगाई, पाकिस्तानी रुपये की कमज़ोरी तमाम ऐसे प्रॉजेक्ट पर ब्रेक लगा रही है। जिसे विदेशी मदद से तैयार किया जा रहा है। इसी में शामिल है चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा।

चीन का 40 अरब का काम फंसा

दरअसल चीन ने CPEC में 40 अरब से अधिक निवेश कर रखी है। लेकिन पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान के हालात ने इस प्रॉजेक्ट पर और चीन के अधिकारियों कर्मियों को बहुत चोट पहुंचाई है। हालांकि बीजिंग ने इसे बर्दाश्त किया और इस्लामाबाद को फ़ंड भी मुहैया कराए। लेकिन अब जब CPEC की कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हुई हैं और उनका काम रुका पड़ा है। पाकिस्तान एक तरफ़ आर्थिक मंदी के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है। दूसरी तरफ़ इमरान ख़ान के मामले से मुल्क में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। जिससे चीन की महत्वाकांक्षाएं टूट रही हैं और इससे बीजिंग बहुत ही नाराज़ है।

-CPEC की योजनाओं पर लगी रोक

-IMF से नहीं मिल रहा है क़र्ज़
-आर्थिक मंदी की वजह से प्रॉजेक्ट अधूरे
-पावर प्लांट का पेमेंट बाकी है
-कई सौ करोड़ रुपये का बकाया

पाकिस्तान से नाराज हुआ चीन

जिस तरह से पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता नज़र आ रही है। उससे भी चीन को चिंता है कि CPEC के प्रॉजेक्ट आगे भी लेट होते चले जाएंगे और बकाए की रक़म भी बढ़ती चली जाएगी। ऐसे में जिस बेलआउट पैकेज की उम्मीद पाकिस्तान ने IMF से लगा रखी हैं। वो बेलआउट पैकेज मिलने में और भी ज़्यादा अड़चनें आ सकती हैं। ज़ाहिर है चीन को इसी वजह से नाराज़गी है। और उसे पाकिस्तान में किया अपना निवेश डूबता हुआ नज़र आ रहा है।

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